||ॐ नमः शिवाय: ।।
विश्व ज्योतिष अध्यात्म विश्व विद्यापीठ, झारखंड
आपार हर्ष के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि संस्थान ज्योतिष प्रेमी/ विद्यार्थी/ शोधकर्ता छात्र- छात्राओं के उच्च शिक्षा/हेतु नियमित/ पत्राचार द्वारा ज्योतिष विज्ञान के अंतर्गत वैदिक ज्योतिष विज्ञान, मौसम विज्ञान, प्राच्य पराविद्या, खगोल शास्त्र, धर्म, अध्यात्म, आत्मचिंतन, अंक विद्या, हस्त रेखा ज्ञान, हस्ताक्षर -विज्ञान, वार्स्तु, फेंग शुई, पिरामिड, यंत्र- मंत्र- तंत्र, सम्मोहन, वैकल्पिक चिकित्सा, रत्न विज्ञान, रंग चिकित्सा, मुखाकृति विज्ञान जैसे 31 विषयों के शिक्षा का ज्ञान प्रमाण- पत्र ग्रहण कर डिग्री कोर्स के साथ vjavv के द्वारा पी.एचडी/ डि.लीट. कर जीवन को सफल बना सकते हैं डॉ. महर्षि जे जाहन्वी (राजज्योतिषी) "आस्था", धर्मपुर, जसीडीह-814142 बैद्यनाथधाम-देवघर, झारखंड, भारत आप 8210166955/9431396804 में फोन पर बात कर सकतें हैं ।
Viswa Jyotish Adhyatma Viswa Vidyapith
ज्योतिष
ज्योतिष विषय वेदों जितना ही प्राचीन है। इसके गणित भाग के बारे में तो बहुत स्पष्टता से कहा जा सकता है कि इसके बारे में वेदों में स्पष्ट गणनाएं दी हुई हैं। फलित भाग के बारे में बहुत बाद में जानकारी मिलती है। प्राचीन काल में ग्रह, नक्षत्रों और अन्य खगोलीय पिण्डों का अध्ययन करने के विषय को ही ज्योतिष कहा गया था।कालांतर में मानवीय जीवन के विश्लेषण से संबंधित विषय तक इस विषय को संकीर्ण |
वास्तु
जिस भूमि पर जीव निवास करते हैं -उसे वास्तु कहा जाता है | वास्तु के शुभाशुभ फल प्राप्ति के लिए -”मत्स्य पुराण-अ०-२५१ में लिखा है कि अंधकासुर के वध के समय भगवान् शंकर के ललाट से -पृथ्वी पर जो स्वेदबिंदु गिरे उनसे एक भयंकर आकृति का पुरुष प्रकट हुआ | जिसने अन्धकगणों का रक्त पान किया-फिर भी अतृप ही रहा |अतृप्त होने के कारण-त्रिलोकी को भक्षण करने के लिए चल दिया |
तंत्र विज्ञान
व्यक्ति आम हो या खास, समस्या सबके पीछे रहती हैं। हम लोग छोटे-छोटे उपाय जानते हैं पर उनकी विधिवत जानकारी के अभाव में उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं। कोई इंसान अपनी किसी इच्छा की पूर्ति के लिए कोशिशें कर के हार जाता है तो फिर वह मंदिरों में जाकर मन्नतें मांगता है। इस तरह वह पैसों व समय दोनों का नुकसान उठाता है। फिर भी वह निश्चयपूर्वक नहीं कह सकता कि उसकी मनोकामना पूरी हो |
