न्यास (विश्व ज्योतिष अध्यात्म विश्वविद्यापीठ) का विलेख आज दि. 19/ 04/ 2010 को
आशा ज्योति, पति डॉ० महर्षि जे. जाह्नवी, पता- बड़ालाल स्ट्रीट, अपर बाजार राँची
थाना-कोतवाली, जिला-राँची-834001, (झारखण्ड प्रदेश) न्यासकर्ता(ट्रस्ट1.डॉ० महर्षि जे जाह्नवी पिता-स्वामी भूलकन साह ,पता- बड़ालाल स्ट्रीट, अपर बाजार राँची, थाना-कोतवाली, जिला-राँची-834001, झारखण्ड प्रदेश)।
न्यास का नाम – विश्व ज्योतिष अध्यात्म विश्वविद्यापीठ
VISWAJYOTISHADHYATMA VISWAVIDYAPITHA
न्यास का कार्यालय – न्यास (विश्व ज्योतिष अध्यात्म विश्वविद्यापीठ) का निबंधित कार्यालय पता- बड़ालाल स्ट्रीट, अपर बाजार, राँची, थाना-कोतवाली, जिला-राँची-834001, (झारखण्ड प्रदेश)
न्यास का आंचलिक कार्यालय – विश्व ज्योतिष अध्यात्म विश्वविद्यापीठ (VISWAJYOTISHADHYATMA VISWAVIDYAPITHA) “आस्था”, धर्मपुर, आसाम रोड, पत्रालाय+ थाना-जसीडीह, बी० देवघर, जनपद-देवघर – 814142। (झारखण्ड राज्य) भारत।
1) विश्व ज्योतिष अध्यात्म विश्वविद्यापीठ का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति प्राच्य – विद्या, देववाणी संस्कृत के रक्षार्थ जन – जन-कल्याणार्थ ज्योतिष/प्रेमी/विद्यार्थी/शोधकर्ता/छात्र – छात्राओं के उच्च शिक्षा हेतु नियमित/पत्राचार पाठ्यक्रम द्वारा ज्योतिष, वस्तु, तंत्र, अंक, हस्तरेखा, रेकी, योग, अध्यात्म, विद्या के माध्यम से विधार्थियों को शतप्रतिशत स्वावलंबी बनाने के लिए “ज्योतिष दिवाकर ज्योतिष भूषण, ज्योतिष अलंकार, शास्त्री, आचार्य, ज्योतिष वारिधि (पी.एच.डी.) ज्योतिष विद्या वाचस्पति (एम.फिल) पाठ्यक्रम कोर्स डिग्री दे स्वरोजगार बनाने में 100% प्रतिशत सहायक होगी।
2विश्व के तमाम क्षेत्रों के विद्वान दैवज्ञ मनीषियों को उचित स्तरीय मान सम्मान देना वेद पुराण रामायण, गीता, कुरान, गुरु ग्रंथ, बाइबिल, जैन, बौद्ध, पारसी, बहाई, धर्मग्रंथ, अध्यात्म, ज्योतिष, वास्तु तंत्र मंत्र योग, वैकल्पिक चिकित्सा के शोधकर्ताओं लेखक, विद्वानों को पी .एच .डी. लीट, फील एम. फिल डी. फिल एवं स्वर्ण पदक खादी देकर सम्मानित करना देश-विदेश में संगोष्ठी सेमिनार सम्मेलन में सम्मिलित करना एवं सम्मानित करना शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना महिला ज्योतिष से कार्यकर्ताओं के लिए शुल्क में 50% छूट होगी।
3 शिक्षा के प्रचार-प्रसार द्वारा निरक्षरता दूर करना साक्षरता को बल देना महिलाओं को शिक्षित बनाना साक्षर बनाना ज्योतिष विज्ञान से जन्म कुंडली निर्माण तंत्र – मंत्र कर्म कांड जनहितार्थ रत्न चिकित्सा द्वारा रोगों का निदान व जनकल्याण की भावना से निशुल्क समाज समस्याओं का समाधान करना ग्रह नक्षत्र वाटिका लगाना।
4 भारतीय की भावना राष्ट्रीय हित में जागृत करना मातृभूमि की रक्षा करना भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाना जाति-धर्म के भेदभाव को मिटाने तथा अहिंसा मूलमंत्र जन-जन तक पहुंचाना मानव महिला सहित सभी प्राणियों की सेवा करना आर्यव्रत सहित विश्व के सभी विश्वविद्यालयों में संस्कृत व ज्योतिष को नियमित पाठ्यक्रम में लागू करने हेतु हर संभव प्रयत्न कर लागू करना एवं शिक्षा को घर-घर तक पहुंचाना साथ ही साक्षर बनाना। यह एक अंतर्राष्ट्रीय वैदिक विश्वविद्यालय होगा सभी धर्मों के धर्म ग्रंथ होंगे मानव सेवा ही सच्ची इबादत हो आराधना है।
5 वेदों के श्लोकों को लोक कल्याणार्थ दूरदर्शन द्वारा प्रातः कालीन आज के विचार कार्यक्रम में सम्मिलित कर प्रसारित करना वेदों के प्रचार-प्रसार हेतु विश्व कल्याणार्थ वेद वेदांत नामक (विश्व के सर्व धर्म संगम की संपूर्ण मासिक विविध) का श्रीगणेश करना विश्व भर के सारे भेदभाव को मिटाने हेतु प्रकाशित कर पाठशाला पुस्तकालय वाचनालय मदरसा मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा चर्च जैन बौद्ध बहाई मंदिर तथा अन्य सभी धर्मों की मंदिरों सहित विशिष्ट विद्वानों की सेवा में नि:शुल्क अवलोकनार्थ प्रेषित करना देना दातव्य होंगे।
अध्यात्म ज्योतिष विज्ञान संस्कृत साहित्य की रक्षा हेतु विश्व ज्योतिष अध्यात्म विश्व विद्यापीठ VISWA JYOTISH ADHYAYA VISHWAVIDYALAYA द्वारा शिक्षा की व्यवस्था साक्षरता अभियान को सफल बनाने हेतु घर – घर तक शिक्षा को पहुंचाना | उच्च शिक्षा का व्यवस्था करना अध्यात्म विज्ञान द्वारा सभी समस्याओं के समाधान हेतु (जाह्नवी, ज्योतिष अध्यात्म अध्ययन अनुसंधान व साहित्य जगत) द्वारा गहन खोज, शोध कार्य करना, दुर्लभ जड़ी बूटियों की खोज करना, रत्ना व मंत्र द्वारा एवं वैकल्पिक चिकित्सा द्वारा भी रोगों का निदान करना। ज्योतिष विज्ञान द्वारा दर्शाए गए पद्धति द्वारा वैकल्पिक चिकित्सा विभिन्न रोगों का सरल सहज, संस्था समाधान रत्नों द्वारा जनकल्याणार्थ किया जाएगा। मंत्र – यंत्र – तंत्र द्वारा रोगों का भी निदान नि:शुल्क होगा। रोग रत्नों पर शोध कार्य कर नि:शुल्क सलाह, निदान जनमानस के सभी समस्याओं का सस्ता व सरल निदान कर संपूर्ण कल्याण में योगदान देना, करना।
ज्योतिष अध्यात्म के क्षेत्र में अब अध्ययन अध्यापन एवं शोध के क्षेत्र में कार्यरत ज्योतिष विद्वान शिक्षण संस्थानों एवं स्वयंसेवी संस्थानों के ज्योतिष देवज्ञों हेतु। अखिल भारतीय ज्योतिष महासंघ (ALL INDIA ASTROLOGER’S ASSOCION) तथा एशियन एस्ट्रोलॉजर एकेडमी द्वारा पर्सनल पर्सनालिटी नमक ‘A Group of Great Astrologer’s’ का जन्म दे। एशियन महादेव साहित्य संसार के सर्वमान्य ज्योतिष दैवज्ञों से सहयोग लें, शामिल किया जाएगा | उपरोक्त कार्य विश्व कल्याणार्थ किए जाएंगे | यह एसोसिएशन ग्रुप ज्योतिष संस्थानों, ज्योतिष के देवज्ञों एवं ज्योतिष प्रेमियों अनुपम व अकेला संयुक्त मंच होगा जहां सभी मिलजुल कर इस अभियान के व्यापक (विश्वव्यापी) प्रचार – प्रसार एवं विकास की नई योजनाओं को मुक्त रूप देने का प्रयास करेंगे और समय-समय पर इस गहना विज्ञान के बारे में आनेवाली भारतीयों का निराकरण करने के साथ-साथ अपनी कठिनाइयों को दूर करने के लिए एक सहयोग का वातावरण बनाएंगे समय-समय पर ज्योतिष विज्ञान के प्रायोगिक के अनुसाधनों को गति देने तथा गहन अनुसंधात्मक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन हेतु संस्थान कार्य करेगी | प्राच्य विद्या (ज्योतिष अध्यात्म विज्ञान) की प्रतिष्ठा भारतीय संस्कृति व देववाणी संस्कृत की रक्षा हेतु ज्योतिषीय पर्व महोत्सव के श्री गणेश किया जा चुका है | सभी विद्वान ज्योतिषियों धर्माचार्यों द्वारा सप्ताह में एक दिन आम जनता को परामर्श / सलाह, मंत्र – उच्चारण सेवा सदा ही मुफ्त दिलवाने हेतु समय-समय पर संगोष्ठी व ज्योतिष, सर्व धर्म महासम्मेलन करना | सभी ज्योतिष प्रेमी शोध छात्र छात्रा विद्वान व कर्मकांडोंयों को सहयोग के लिए प्रेरित करना इस कल्याणार्थ कार्य हेतु सभी विद्वतजनों का समारोह सम्मान करना तथा अलंकित करना। दैवत ज्योतिष विद्वान व कई अन्य क्षेत्र के धर्मधिकारी, विद्वानों व शोध अनुसंधानकर्ताओं के शोध कार्य है से संतुष्ट होने पर विश्व ज्योतिष अध्यात्म विश्वविद्यापीठ, डी.एस.सी., पी.एच.डी., (डॉ.) डि.लीट, डी. फिल व एम. फिल, प्रोफेसर ऑफ एस्ट्रोलॉजी तथा अन्य विशिष्ट सम्मान से सम्मानित करेगी साथ ही सम्मान पत्र, शाल अंगवस्त्र, समृति चिन्ह, श्रीफल ट्रॉफी ,स्वर्ण, रजत वह कांस्य पदक प्रदान करेगी राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सेवा सर्वधर्म सामान्य जन कल्याण कार्य हेतु भी सेवा भावी ज्योतिष दैवज्ञों को “ज्योतिष – पद्मश्री”एवं “ज्योतिष – पद्मभूषण” ज्योतिष रत्न, ज्योतिष श्री मैं नगद राशि के साथ सर्वोच्च सम्मान राष्ट्रसम्मानित महामहिम के हाथों सम्मानित भी करायेगी। दातव्य होंगे। वर्तमान शिक्षा पद्धति इतनी कठिनता एवं खर्चीली होने के बावजूद भी छात्रों को सरकारी तथा गैर सरकारी या स्वरोजगार दिलाने में पूर्णरूपेण सफल नहीं होती है रोजगार ना पाकर प्रतिवर्ष लाखों शिक्षित युवक और युवतियां को निराश का सामना करना पड़ता है | रोजगार प्राप्त करने हेतु छात्रों को ऐसे व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने की जरूरत है, जिसमें शिक्षा पूरी करते – करते वे अपने रोजगार या स्वरोजगार के लिए दूसरे पर कदापि ही निर्भर न रहे, इस हेतु इंडियन एस्ट्रोलॉजीकल रिसर्च इंस्टिट्यूट इंडिया द्वारा व्यावसायिक एवं रोजगारों नियमित/पत्राचार पाठ्यक्रम की व्यवस्था है
1)विद्यापीठ ज्योतिष प्रेमी/विद्यार्थी/शोध छात्र-छात्राओं के उच्च शिक्षा हेतु नियमित/पत्राचार द्वारा ज्योतिष विज्ञान के अन्तर्गत वैदिक विज्ञान, मौसम विज्ञान, प्राच्य पराविद्या, खगोलशास्त्र, धर्म अध्यात्म, आत्मचिन्तन, अंकविद्या, हस्तरेखा ज्ञान, हस्ताक्षर-विज्ञान, वास्तु-फेंगसूई, पिरामिड, यंत्र-मंत्र-तंत्र, कर्मकाण्ड, स्वाध्याय, साधना, प्राणायाम, योग, मेडिटेशन, रैकी विद्या, एक्यूप्रेशर चिकित्सा, ज्योतिष, सम्मोहन, चुम्बकीय चिकित्सा, वैकल्पिक चिकित्सा, रत्न विज्ञान, रंग चिकित्सा, मुखाकृति विज्ञान आदि विभिन्न प्रकार के सभी उपरोक्त विषयों के शिक्षा ज्ञान हेतु एवं एस्ट्रोरेमेडी की भी व्यवस्था है। देश (राष्ट्र) की बेरोजगारी-बेकारी के लिए उपरोक्त विभिन्न विषयों की नियमित/पत्राचार द्वारा पढ़ाई की व्यवस्था की गयी है। इनमें से जो भी विषय का चयन करें, चयनकर छात्र-छात्राएँ 100 प्रतिशत लाभ उठायें, उठाकर स्वालम्बी हो सकते हैं। स्वनियोजित कार्यक्रम है जो स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत फलीभूत है। इसे यू.जी.सी. भारत सरकार व विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता की भी सिफारिश की। जायेगी। इसके अन्तर्गत पूर्व मध्यमा, उत्तरमध्यमा, शास्त्री (स्नातक), आचार्)
2) ज्योतिष विज्ञान तथा इससे संबंधित विद्यार्थियों हेतु वेद ज्योतिष साहित्य अध्यात्म विज्ञान शोध संस्थान द्वारा विश्व कल्याण करना | जन मानस को मार्गदर्शन देना | राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सेमिनार संगठित शिविर प्रवचन एवं सभाएं आयोजित कर लोगों में चेतना जागृत करना जनकल्याणअर्थ शैक्षणिक एवं विकासोन्मुख क्रियाकलापों से संबंधित गोष्ठियां, सभा, सेमिनार, सम्मेलन, सिंपोजियम, कार्यशाला, वाद – विवाद प्रतियोगिता, क्विज, फारम, पर्यटन, वन – विज्ञान, प्रदर्शनी. आदि का आयोजन समय-समय पर जाएगा।
3) ज्योतिष विज्ञान धर्म शास्त्र पुराण तथा इससे संबंधित प्राचीन ग्रंथों एवं नवीन पुस्तकों का संचय करना तथा सुरक्षित रखना शोध शैक्षणिक संस्था हेतु उपकरणों और अन्य वस्तुओं का क्रय-विक्रय करना आयत निर्यात करना साथ ही निर्माण करना | हमारे प्राचीन पंचकों में व्रत पर्व एवं उत्सव में भेद होने के कारण होनेवाली जनता की असुविधा को ध्यान में रखते हुए संस्थान पंचांगों की एकरूपता स्थापित करने हेतु भारतीय ज्योतिष शास्त्र एवं धर्मशास्त्र के विद्वानों कि एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करेगी जो हमारे विभिन्न पंचांगों में एकता तथा दृकतुल्यता की रूपरेखा तैयार की जाएगी, इसे संस्थान के महासम्मेलन में व्रत, पर्व एवं उत्सवों में एकरूपता लाने के लिए यह प्रस्ताव रखेगी | भारत के सभी संस्थाओं संगठनों के सहयोग से इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर यथाशीघ्र सम्पन्न कराया जाएगा |
4)समाज के जैव सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक पहलुओं पर अनुसंधानात्मक कार्य किये जायेंगे जो संसार के सभी धर्म, जाति, लिंग आदि भेदभावों से परे रहकर निःस्वार्थ कार्य करेगी। मानवशास्त्र और ज्योतिष शास्त्र से संबंधित विषयों पर अन्वेषणात्मक कार्य करेंगी, वातावरण विज्ञान, मौसम विज्ञान, खगोल शास्त्रीय मान्यताएँ अध्यात्म-सिंधु आदि से संबंधित मानवी कल्याण के विभिन्न ….. अध्ययन क्षेत्र में रखा जायेगा।
5)ज्योतिष विज्ञान पद्धति द्वारा वैकल्पिक चिकित्सा से विभिन्न रोगों का निदान जन – कल्याणार्थ किया जाएगा यंत्र – तंत्र – मंत्र अध्यात्म योग इससे संबंधित विधाओं द्वारा अंधविश्वास, भ्रम, भय एवं ठगागिरी, चार सौ बीस (420) आदि से संबंधित लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करा कानूनी करवाई की जाएगी |
विषमता, अन्याय, अत्याचार, व्यभिचार, भ्रष्टाचार, शोषण आदि के विरोध में लोक-शक्ति तैयार कर अहिंसक ढंग से राष्ट्रपिता बापू के विचारों द्वारा लोकहित में उनका हल ढूंढना। जनता को ज्योतिष द्वारा गुमराह होने से बचाने का कार्य भी संस्थान करेगी। आमलोगों को सावधान करने के लिए लोक शिक्षण कार्यक्रम करेगी
6)अध्यात्म, ज्योतिष विज्ञान तंत्र-यंत्र-मंत्र विद्या द्वारा उपयोग में लाये वाले रत्न उपरत्न, नवग्रह, 28 नक्षत्र एवं 12 राशियों से सम्बन्धित जडी (मूल), पौध एय। वृक्षारोपण करना तथा पौधशाला का निर्माण करना, यत्र, रुद्राक्ष एवं रत्नों की मूर्ति का उत्पादन, रत्न उत्पादन, निर्माण, क्रय-विक्रय, आयात निर्यात तथा जन-कल्याणार्थ रत्न परीक्षण मुफ्त की जायेगी|
7)वेद, कर्मकाण्ड, भवन निर्माण तथा भू-खण्ड चयन हेतु फेंगसूई ज्ञाता/वारस्तुशारत्री को जनहितार्थ उपलब्ध कराना, सभी प्रकार की समस्याओं का सरल व सस्ता समाधान करना, कम्प्यूटर, दूरभाष, दूरदर्शन, चलचित्र, आकाशवाणी एवं अन्य संचार साधनों द्वारा ज्योतिष विज्ञान इससे सम्बन्धित विद्याओं एवं विद्याओं के सन्दर्भ में जानकारी तथा सूचनाएँ प्राप्त करना और उपलब्ध कराना। आवश्यक पहलओं को उजागर करने तथा प्रचार-प्रसार हेतु फिल्म (चलचित्र) निर्माण करना, दूरदर्शन हेतु फिल्म निर्माण करना साथ ही लोकहित में प्रदर्शन करना। राष्ट्र कल्याण की भावना से जनहितार्थ में सदैव कार्य करना ही संस्था का मूल उद्देश्य है।
8)सरकारी, गैर सरकारी या समाजसेवी संस्थाओं अथवा व्यक्ति विशेष द्वारा दी। जानेवाली सहायता लोगों को प्राप्त कराने की समुचित व्यवस्था करना तथा न्यास-सस्थान के विभिन्न कार्यों में व्यय करना।
9)न्यास-संस्थान सभी धर्मों के सभी क्षेत्रों के विद्वान, ज्योतिष दैवज्ञ, बुजुर्ग पण्डितों, पादरी, मौलाना, बौद्धभिक्षु, जैन संन्यासियों/ साध्वी, सिक्ख, कर्मकाण्डियों व ज्योतिष के विचार–पतियों के 60 वर्ष के बाद आवश्यकता पूर्ति हेतु धर्मार्थ, कल्याणार्थ पेंशन दिलाने हेतु भारत सरकार से आग्रह करेगी व सलाह देगी।
पंडित बीमार अवस्था भारतीय विद्वान, साहित्यकार, कवि वैज्ञानिक, कर्मचारियों शोधकर्ताओं एवं ज्योतिष दैवज्ञों को हर संभव मदद करेगी। विश्व के किसी भी राष्ट्र, राज्य व किसी भी विषय के विद्वान सहित ज्योतिष्य मनीषियों के मान मर्यादा की रक्षा करेगी एवं संस्था के सभी ज्योतिष विद्वानों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस की भी व्यवस्था करेगी ताकि भविष्य सुरक्षित हो। संस्था के सभी शाखा में फास्ट एड बॉक्स की व्यवस्था होगी|
10) भारतीय विद्वानों के लिए आवागमन हेतु रेल, वायुयान वाह बस सेवा यात्रा मुफ्त में या रियायत दर पर यात्रा कर लाभ उठा सकेंगे। लाभ दिलवाने भी अपना मूल कर्तव्य उद्देश्य समझती है। सभी धर्मों के धर्मज्ञ, आस्थावान ज्योतिष के विद्वानगण जिससे मुफ्त में या रियायती दर के टिकट द्वारा सभा संगोष्ठी सेमिनार महासम्मेलन में भागीदारी देने में वा धर्मार्थ तीर्थ हेतु तो यात्रा कर सकेंगे। संस्थान इस हेतु भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से आग्रह करेगी।
11) भारत सरकार उच्च स्तरीय ज्योतिष सलाहकार समिति की संस्थापना कर होनेवाली सभी भावी घटनाओं की पूर्व जानकारी ज्योतिष दैवज्ञों से लेता रहे। इस माध्यम से भारत सहित विश्व का सदैव संपूर्ण कल्याण होगा। इस कार्य हेतु महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री (भारत), राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों को संस्थान पूर्व सूचना दे चुकी है, साथ ही पुन: प्रार्थना पत्र के साथ सलाह व सूचना देगी, देती रहेगी यह संस्थान का नैतिक कर्तव्य होगा। राष्ट्रहित व लोक कल्याण की भावना से यह कार्य संस्थान सदैव की है – करेगी, करती रहेगी, अनवरत कर रही है।
जीवनरूपी समुद्र में धर्म अध्यात्म ज्योतिष – विज्ञान पतवार की भांति है, जो हर तूफान से बचाकर, आपको, आपके संसार को किनारे ले आएगी आपकी आस्था अवश्य होनी चाहिए संस्थान द्वारा निस्वार्थ नि:शुल्क सेवा सलाह, परामर्श मुफ्त में दी जाएगी। जनहितार्थ लोक कल्याणार्थ सेवा सदैव हर क्षण हर पल करेगी वाह वर्षों से कर रही है। नि:स्वार्थ सेवा की ही सच्ची मानव सेवा है। दिन सेवा देश सेवा समान है। संस्थान परमार्थ सेवा ही सच्चा उद्देश्य भी है।
